बिहार पुलिस को एक बार फिर झटका लगा , छ मामलों में फ़रार को पकड़ने में पुलिस नाकामयाब रही । रोहतास के चार और भोजपुर के दो मामलों में आरोपी हुल्लास पांडे की तलाश पुलिस को लंबे समय से थी । लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं पायी अलबत्ता निर्दलीय के तौर पर विधान परिषद चुनाव जीते हुल्लास पांडे ने पुलिस के समक्ष उस समय आत्म सर्मपण किया जब वे परिषद में सदस्यता ग्रहण करने आये थे ।
आप है हुल्लास पांडे , अब किसी परिचय के मोहताज नहीं । परिचय एक कि आप सुनीप पांडेय के भाई है , सुनील पांडेय जो दर्जनों मामलों के आरोपी है और पीरो से जद यू के विधायक है . अभी भी एक मामले में सलाखों के पीछे ही है । दूसरा आप पर कई आपराधिक मामले दर्ज है और आपकी छवि एक बाहुबलि की है । रंगदारी , अपहरण , हत्या और हत्या के प्रयास के अलावा आमर्स एक्ट के कई मामले इनके शान को बढाते है । वैसे अब तो साहब खुद माननीय हो गए है चूंकि भुमिगत रहकर ही भोजपुर - बक्सर विधान परिषद सीट से निर्दलीय चुनाव जीते है । वह भी तब , जब पुलिस को उनकी तलाश छ मामलों में थी , जिनमें चार हत्या और दो हत्या के प्रयास के साथ आमर्स एक्ट से जुडा है । बहरहाल विधान परिषद का चुनाव जीतकर आने के बाद इनका एन डी ए के नेताओँ ने गर्मजोशी से स्वागत किया । स्वागत भी उन्हीं लोगों ने किया जिनके दल के उम्मीदवार को हुल्लास पांडेय बुरी तरह से हरा कर आये थे ।
पुलिस को हुल्लास के पटना आने की सूचना कई दिनों से थी इसलिए विधान मंडल के पास सुरक्षा बढा दिया गया था ताकि नजर आते ही पुलिस इन्हें दबोच सके । लेकिन हुल्लास न सिर्फ आये बल्कि अपने कई समर्थकों के साथ आये और पुलिस ने या उन्हें पहचाना नहीं । और अगर पहचाना तो नहीं पहचानने का नाटक बहुत देर तक किया । जब हुल्लास सदन में सदस्यता ले चुके और ठंडा घर में आराम कर चुके तो दोपहर में उन्होंने आराम से अपने आपको कानून के हवाले कर दिया , इस भरोसे के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही उनके नेता है औऱ कानून पर उन्हें पूरा भरोसा है । मुख्यमंत्री भी इस मामले पर कानून को अपना काम करने देने की बात करते हुए मामले को टाल गए ।
बहरहाल हुल्लास पांडेय पहले और आखिरी आरोपी नहीं है जिन्होंने पुलिस के साथ लुका छिपी खेल खेला या फिर पुलिस ने इन्हें खेलने दिया । चुंकि पुरानी कहावत है जब सईंया भईले कोतवाल तो डर काहे का ।
रविवार, 26 जुलाई 2009
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